OD की दर अधिक हो तो
OD में अतिरिक्त जमा लोन का ब्याज घटाती है। लेकिन उसकी दर सामान्य होम लोन से अधिक हो तो पहले उस अंतर की भरपाई करनी होगी। असली सवाल है कि बिल और निकासी के बाद पूरे साल औसतन कितना पैसा रख सकेंगे। दोनों लिखित प्रस्तावों में एक जैसा बकाया और बची अवधि लेकर तुलना करें।
SBI की पुस्तिका में Maxgain को OD होम लोन बताया गया है। बैंक ऑफ बड़ौदा Max Savings में लिंक्ड खाते से ऑफसेट का ढाँचा बताता है। SBI पुस्तिका और बैंक ऑफ बड़ौदा का उत्पाद विवरण देखें। नीचे की दरें केवल समझाने के लिए हैं; ये किसी बैंक का वर्तमान प्रस्ताव या निकासी की गारंटी नहीं हैं।
₹90,000 के ऑफसेट से ₹63,000 ही क्यों बचते हैं?
मान लें एक वर्ष तक ऋण शेष ₹50 लाख स्थिर रहता है। सामान्य ऋण की काल्पनिक दर 8.5%, OD की 9%, औसत पात्र अतिरिक्त राशि ₹10 लाख और OD का अतिरिक्त सालाना शुल्क ₹2,000 है। इस सरल उदाहरण में मूलधन की घटती राशि, दर बदलना और पैसे के दूसरे उपयोग को शामिल नहीं किया गया है। सामान्य ऋण का ब्याज ₹50,00,000 × 8.5% = ₹4,25,000 होगा।
OD में ब्याज का आधार ₹50 लाख − ₹10 लाख = ₹40 लाख है। इसका 9% ब्याज ₹3,60,000 और शुल्क सहित खर्च ₹3,62,000 है। अंतर ₹63,000 है। सिर्फ ₹10 लाख का 9%, यानी ₹90,000, पूरा फायदा बताना गलत होगा। सामान्य ऋण से अधिक दर के कारण ₹25,000 और शुल्क में ₹2,000 खर्च हो रहे हैं। दर, जमा या शुल्क बदलेंगे तो यह अंतर भी बदलेगा।
इस उदाहरण में औसतन ₹3 लाख चाहिए
सरल ब्रेक-ईवन सूत्र है: [ऋण शेष × (OD दर − सामान्य दर) + अतिरिक्त सालाना शुल्क] ÷ OD दर। दरों को दशमलव में लें। इस उदाहरण में [₹50,00,000 × 0.005 + ₹2,000] ÷ 0.09 = ₹3 लाख आता है। इतना औसत पात्र अतिरिक्त शेष रखने पर दोनों का अनुमानित उधारी खर्च बराबर होता है।
यदि औसत शेष ₹2 लाख हो, तो 9% से ₹18,000 का ऑफसेट मिलेगा, जबकि अधिक दर और शुल्क का खर्च ₹27,000 है। OD लगभग ₹9,000 महँगा पड़ेगा। यदि पूरे साल के बजाय केवल आधा साल ₹10 लाख रखें और बाकी समय शून्य हो, तो औसत करीब ₹5 लाख होगा। वेतन आते ही खाते में दिखी पूरी रकम को साल भर की बचत न मानें।
वेतन वाले दिन का शेष औसत नहीं है
वेतन जमा होने के बाद बिल, स्कूल फीस, दूसरे ट्रांसफर और नियोजित खर्च घटाएँ। हर दिन की पात्र रकम जोड़कर दिनों की संख्या से भाग दें। क्रेडिट कब से ब्याज घटाता है, यह बैंक के नियम से जाँचें। साधारण अनुमान के साथ एक कम शेष वाली स्थिति भी बनाएँ, ताकि आपातकालीन निकासी का असर दिखे।
वास्तविक ऋण में मूलधन घटता है, ड्रॉइंग पावर बदल सकती है और फ्लोटिंग दर अलग तारीख पर रीसेट हो सकती है। अधिक सटीक तुलना के लिए हर महीने या दिन के शेष और दर की अलग समयरेखा चाहिए। सालाना सूत्र शुरुआती जाँच है; इसे पूरे ऋण की निश्चित बचत या निवेश रिटर्न न कहें।
सालाना सूत्र में क्या छूट जाता है?
प्रोसेसिंग, रूपांतरण और सालाना शुल्क सूची में रखें। केवल OD के कारण बढ़े खर्च अलग पहचानें। एक बार लगने वाला शुल्क हर साल न जोड़ें, लेकिन पहले वर्ष से हटाएँ भी नहीं। शुल्क ऋण में जुड़ा हो तो उस पर लगने वाला ब्याज भी देखें। पैसा कहीं और रखने से मिलने वाली सुविधा या संभावित आय को अलग समझें; सभी विकल्पों पर एक जैसी अवधि और खर्च का आधार रखें।
दोनों लिखित प्रस्ताव साथ रखकर देखें
- दोनों प्रस्ताव में समान बकाया और बची अवधि लें।
- विज्ञापन की शुरुआती दर के बजाय व्यक्तिगत लिखित दर और रीसेट पढ़ें।
- शून्य शेष वाले दिनों सहित सावधानी से औसत निकालें।
- एक बार और बार-बार लगने वाले अतिरिक्त शुल्क जोड़ें।
- निकासी, कम बचत और अधिक दर-अंतर पर फिर गणना करें।
- स्थायी प्रीपेमेंट और अस्थायी जमा का अंतर लिखित में समझें।
छोटी निकासी से निष्कर्ष पलट जाए तो चुनाव नकदी प्रवाह के प्रति संवेदनशील है। वास्तविक स्टेटमेंट के आधार पर समय-समय पर दोबारा जाँचें। सुविधा का मूल्य हो सकता है, लेकिन उसे निश्चित बचत का नाम न दें।
आम सवाल
क्या ऑफसेट को 9% रिटर्न कह सकते हैं?
नहीं। यह ऋण ब्याज में कमी का उदाहरण है। अधिक दर और अतिरिक्त शुल्क घटाने होंगे। दूसरे उपयोग और व्यक्तिगत कर स्थिति अलग तुलना हैं।
सूत्र में कौन सा शेष लें?
पूरी अवधि का औसत पात्र अतिरिक्त शेष लें, सबसे बड़ी जमा या मूल स्वीकृत सीमा नहीं।
क्या ब्रेक-ईवन पूरे ऋण की भविष्यवाणी है?
नहीं। उदाहरण में एक वर्ष का शेष और दर स्थिर है। वास्तविक भुगतान, निकासी और रीसेट के लिए समयरेखा चाहिए।
आपातकाल में पैसा निकाल लें तो?
ऑफसेट कम होगा और ऋण ब्याज बढ़ेगा। कम शेष पर गणना करें तथा खाते की निकासी शर्तें जाँचें।
स्रोत और आगे पढ़ें
जानकारी के लिए, व्यक्तिगत वित्तीय सलाह नहीं। स्रोत नीचे दिए हैं। लेख AI की सहायता से तैयार किए गए हैं। संपादकीय प्रक्रिया पढ़ें।


